जहां नाम नहीं गाने से होती है बच्‍चों की पहचान

Posted by Jay Pathak on Aug 11, 2010 | Leave a Comment

अगर आपका भी मानना है कि नाम में कुछ नहीं रखा, तो एक बार आपको मेघालय के इस गांव में आने की जरूरत है, यहां आकर आपको यकीन हो जाएगा कि नाम में वास्तव में कुछ नहीं रखा. मेघालय का यह गांव ऐसा है, जहां हर बच्चे को उसके नाम की जगह एक गाना गाकर पुकारा जाता है.

मेघालय के ईस्ट खासी हिल जिले के कोंगथोंग गांव में पीढ़ियों से बच्चों को किसी गाने विशेष से पुकाने जाने की परंपरा है. हर बच्चे के जन्म के समय उसके साथ एक गाना जोड़ दिया जाता है, जिससे उसे पूरी जिंदगी पुकारा जाता है.

कोंगथोंग गांव के मुखिया किरटाइड माजाव ने कहा, ‘‘अगर एक परिवार के 10 बच्चे हैं, तो उनके लिए 10 अलग-अलग गाने निर्धारित किए जाते हैं. गाना एक सेकंड से दो मिनट तक की अवधि का हो सकता है.’’

हालांकि बच्चों को इसके अलावा एक नाम भी दिया जाता है, पर इसका उपयोग उन्हें बुलाने में नहीं होता. यहां तक कि दूसरे लोग भी उनके नाम की जगह उन्हें गाने से ही पुकारते हैं.

कॉलेज के छात्र रोथेल खोंगसित इस परंपरा का पूरी तरह पक्ष लेते हुए कहते हैं, ‘‘जैसे ही गाना सुनते हैं, हम फौरन पहचान जाते हैं, किसके लिए गाया जा रहा है.’’ गांव में ऐसे कम से कम 500 लघुगीत प्रचलित हैं.

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